समलैंगिकता नहीं समाज से परेशान थी वो…

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QUEER का मतलब होता है विचित्र इस शब्द का इस्तेमाल 19वीं सदी में उन लोगों के समुदाय के लिए किया जाता रहा है जो समलैंगिक होते हैं यानी आम बोलचाल की भाषा में लेस्बियन, गे, बाईसेक्सुअल और ट्रांसजेंडर, इसे LGBTQ कहा जाता है. हमारे समाज में इसे सदियों से अपराध माना जाता रहा है लोग इसे अस्वाभाविक मानते है और इसी का खामियाज़ा भुगतना पड़ा केरेला की रहने वाली अंजना को, वो ज़िदगी से इतनी परेशान हो गई कि उसने मौत को चुना या फिर कहें कि उसे मरने पर मजबूर किया गया और इस सब के पीछे ज़िम्मेदार कोई और नहीं बल्कि उसके अपने परिवार वाले थे, उसकी आत्महत्या से कुछ दिन पहले उसने ये पोस्ट किया था कि उसके परिवार वाले उसपर एक एसी थेरेपी करवा रहे थे जो गैर कानूनी है और अमानवीय है, ये थेरेपी उसकी संमलैंगिकता को दूर करने के लिए कराई जा रही थी, उसे बार बार इंजेक्शनस लगाए जा रहे थे उसे ऐसे लोगों के बीच रखा गया जो मानसिक रोगी थे, वो रोई चीखी चिल्लाई लेकिन उसकी आवाज़ कहीं पंहुच पाती उससे पहले ही उसे दबा दिया जाता, वो बहुत कुछ सहने के बाद किसी तरह से भाग निकली लेकिन उसकी पोस्ट के मुताबिक उसकी मां ने उसके दोस्तों को धमकाया और साथ ही उसके खिलाफ कंपेलंट भी की, वो आखिर में इतनी मजबूर हो गई कि उसने नर्क बनी इस जिंदगी को अलविदा कहना ही मुनासिब समझा, हमारे देश में ऐसे कई लोग है जिन्हे इस सब से रोज़ गुज़रना पड़ता है इसलिए कई लोग खुल कर ये बताते भी नहीं है कि वो इस समुदाय का हिस्सा है, इस मानसिक तनाव से वो इस कद्र टूट जाते हैं कि उनकी ज़िदगी उजड़ जाती है, वो सांस तो लेते है लेकिन जी नहीं पाते. हमारे समाज को खुल कर अब आगे आना होगा क्योंकि ऐसी कई अनजना है जो समाज की इस पिछड़ी सोच से लड़ कर भी हार जाती है उन्हे आपके साथ और हिम्मत की ज़रूरत है ना कि आपकी धुतकार की।

(यह लेखक के निजी विचार हैं)

मेघना सचदेवा
पत्रकार

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