जानें क्यों पड़ा महादेव का नाम नीलकंठ?

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नई दिल्ली/पूजा शर्मा। आज से भगवान शिव का सबसे प्रिय सावन का महीना शुरू हो चुका है. सावन माह को श्रावण मास के नाम से भी जाना जाता है. सावन के इस महीने में महादेव की अराधना करने का बड़ा महत्व होता है. सावन माह में महादेव के भक्त अपनी मनोकामनाओं के लिए महादेव की उपासना करते हैं. दरअसल सावन में भगवान शिव की अराधना करने भक्तों को कृपा जल्दी प्राप्त हो जाती है. बता दें कि इस बार श्रावण मास 6 जुलाई से 3 अगस्त तक रहने वाला है और इस बार श्रावण मास में 5 सोमवार हैं.

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श्रावण मास की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार जब देवता और दानवों ने मिलकर समुंद्र मंथन किया तो अचनाक विष निकला. विष के तेज प्रभाव से सृष्टि में हलचल मच गई. ऐसे में सृष्टि की रक्षा के लिए महादेव ने विष का पान कर लिया. शिव जी ने विष को अपने कंठ के नीचे धारण कर लिया था. यानी विष को गले से नीचे जाने ही नहीं दिया. ये घटना सावन मास में घटी थी, इसीलिए इस महीने का इतना महत्व है और इसीलिए तब से हर वर्ष सावन में भगवान शिव को जल चढ़ाने की परम्परा की शुरुआत हुई.

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भगवान शिव को क्यों कहा जाता है नीलकंठ

जब महादेव ने विष अपने कंठ के नीचे धारण किया तो विष का ताप शिव जी के ऊपर बढ़ने लगा. विष के प्रभाव से भगवान शिव का कंठ नीला पड़ गया और उनका एक नाम नीलकंठ पड़ गया. जिसके बाद विष का प्रभाव कम करने के लिए पूरे महीने घनघोर वर्षा हुई और विष का प्रभाव कुछ कम हुआ.

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