क्या आप जानते हैं सीता स्वयंवर में भगवान राम द्वारा तोड़े गए “शिव धनुष” का रहस्य, पढ़िए

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नई दिल्ली/ दीक्षा शर्मा। पौराणिक कथाओं के अनुसार कहा जाता है कि राजा जनक भगवान शिव के वंशज थे और  शिव धनुष उन्हें भगवान शिव से ही प्राप्त हुआ था. भगवान शिव ने यह धनुष स्वयं राजा जनक को आशीर्वाद के रूप में दिया था. लेकिन क्या आप जानते हैं भगवान शिव ने यह धनुष राजा जनक को क्यों दिया.

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कहा जाता है कि भगवान शिव का धनुष हमेशा राजा जनक के महल में ही रखा रहता था. दरअसल, बचपन में खेलते हुए माता सीता ने बड़ी आसानी से शिव धनुष को उठा लिया था.
शिव धनुष कोई साधारण धनुष नहीं था बल्कि उस काल का ब्रह्मास्त्र था. जिस धनुष को उठाने के लिए बड़े-बड़े सुरमा पस्त हो जाते थे, उस धनुष को माता सीता ने बचपन में ही एक हाथ से उठा दिया था. आपको बता दें कि भगवान शिव के परम भक्त रावण भी उस धनुष को पाने के लिए मां सीता के स्वयंवर में आया था.

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राजा जनक ने यह सब देख कर दंग रह गए और उन्होंने घोषणा कर दी कि माता सीता का विवाह उसी से होगा जो इस धनुष को उठा कर इसकी प्रत्यंचा को चढ़ा देगा. सारे ऋषि मुनियों को डर था कि अगर यह शिव धनुष रावण के हाथ लग गया था सबकुछ विनाश हो जाएगा इसलिए धनुष को नष्ट करने का आयोजन करने के लिए सही व्यक्ति चुनने का निर्णय ऋषि विश्वामित्र को दिया गया और तब सीता स्वयंवर का आयोजन हुआ और प्रभु श्रीराम जी द्वारा वह नष्ट किया गया था.

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